
हमारे कैसे लोहू, तुम्हारे कैसे दूध, तुम कैसे ब्राह्मन पांडे, हम कैसे सूद ।।
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“ कबीर के राम ” कबीर भया है केतकी, भँवर भये सब दास । जहाँ-जहाँ भक्ति कबीर
की, तहँ-तहँ...
सम्पादक,अपनी माटी
12 hours ago

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